मंगलवार, 23 मार्च 2010

शनिवार, 9 जनवरी 2010

निहत्थे का बल

जिस चीज को हम अपनी कमजोरी समझते हैं वही हमारी सबसे बड़ी ताकत है हमारे पास जो चीज नहीं है उसे खोने का भय भी नहीं है और निर्भय होना सबसे बड़ी शक्ति है। युद्ध भी वही प्रारम्भ करते हैं जिन्हें भय होता है। जो निर्भय है वह पहले से ही विजयी है।

जिसके
पास बन्दूक है वह अधिक भयभीत है। उसे बन्दूक छिनने का भय है, अनुचित रूप से गोली चल जाने का भय है, बन्दूक जब्त होने का भय है, अभियोजन का भय है इत्यादि इत्यादि.... विचार करें और महसूस करें, क्या उसे भी इतने भय हैं जिसके पास बन्दूक नहीं है ? यह बात धन तथा अन्य साधनों के बारे भी लागू होती है।

भय
ही मृत्यु है निर्भय होना ही अमरत्व है जिसे मृत्यु से भय नहीं, वह अमर है संसाधनों को हथियाने की होड़ लगाने से पहले अपने अमरत्व को पहचानो। तुम अपने अमरत्व को पहचान लोगे तो संसाधन तुम्हारी गुलामी करेंगे, अन्यथा तुम संसाधनों के गुलाम बने रहोगे। साधनसम्पन्न होकर भयग्रस्त रहने से साधनहीन रहकर निर्भय रहना श्रेष्ठतर है। कुछ हासिल करना है तो पहले अभय को हासिल करो; दमन करना है तो पहले अपने भय का दमन करो।शासन करना है तो पहले अपनी छुद्र इच्छाओं और दुष्प्रवृत्तियों को शासित करो।

अतएव
, साधन हीनों ! स्वयं को निर्बल निर्धन समझने वालों ! अपनी निर्भयता की शक्ति को पहचानो, योग अर्थात ऐक्यता की शक्ति को पहचानो और एकजुट हो जाओ आत्मानुसाशित व्यक्ति को किसी अन्य से नियंत्रित होने की आवश्यकता नहीं चन्द भयग्रस्त लोगों से भयभीत होना तुम्हारा भ्रम है। वास्तव में तुम पहले से ही विजयी हो

- डा वसिष्ठ नारायण त्रिपाठी

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

Judicial Sub Committee

Judicial Sub Committee of the Socio-legal Sensitization Society has been formally constituted. It comprises of Advocates and Advocate's clerks of Allahabad High Court. Genuine problems and constructive suggestions relating to court management are cordially invited. Volunteers interested in legal research for betterment of judicial management are also cordially invited.

Contact persons : Dr. V.N. Tripathi, Mr. Harishchandra Tiwari, Mr. Sipahi Lal Shukla, Mr. A.N. Pandey, Mr. Naveen Kumar Advocates and Munshi Shobhnath .

Contact place: Chamber No. 34A, High Court, Allahabad.

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2009

रविवार, 13 दिसंबर 2009

Governing body and Sub Commitees


Patrons:

1. Prof. B.N. Pandey
2. .......
3. ........

Advisory Board:

Prof B.P. Singh
Prof Y Singh
Dr. Guru Gyan Singh

Central Executive Committee

National President
: Prof. H.N. Tiwari
National Coordinator: Dr. V.N. Tripathi

Vice Presidents :
Mr. Harishchandra Tiwari
Mr. S.K. Pandey

Secretory : Mr. A.N. Pandey

Joint Secretories :
Dr. Satish Chandra
Pt. Anjani Kumar

Treasurer: Mr. Manvendra Singh


उप समितियां (Sub Committees) :

. पर्यावरण एवं सांस्कृतिक उपसमिति (Environmental and Cultural Sub Committee)
गतिविधियाँ : पर्यावरण संरक्षण हेतु जन जागृति का प्रयास करना तथा प्रकृति पूजा को प्रोत्साहित करने वाले धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करना । फिलहाल , इस उप समिति द्वारा दिनांक २१ अक्टूबर २००७ से इलाहबाद में गंगा तट (रसूलाबाद स्नान घाट ) पर प्रतिदिन गंगा आरती की जाती है और गंगा दशहरा तथा अन्य मुख्य पर्वों पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

. मित्र वाटिका (Mitra Vaatikaa)

गतिविधियाँ : समाज में भाई - चारे को बढ़ावा देना तथा स्थानीय स्तर पर (विशेषतया, बद्री आवास योजना, न्यू मेंहदौरी, इलाहबाद एवं आस पास के निवासियों की ) सामान्य नागरिक समस्याओं के निराकरण हेतु प्रयास करना।

. न्यायिक उप समिति (Judicial Sub Committee)

गतिविधियाँ : इलाहबाद उच्च न्यायालय के कार्यालयों में अधिवक्ताओं, मुंशियों एवं वादकारियों के समक्ष किसी के भी अनुचित आचरण द्वारा आने वाली आम समस्याओं के प्रति जागरूक रहना तथा विधि व्यवसाय के क्षेत्र में नैतिक आदर्शों के पालन हेतु उक्त सभी को प्रेरित करना।

4. Legastrology cell

Activities: Astrological research in the field of Law and legal system. It will focus on impact of planets on Law and legal system and will also include realist theory of Jurisprudence and predictions by social and political scientists .

5. Moot Court and Debate Sub committee:

Activities: Organizing symposiums, moot Courts, Debates, Lecture competition etc.

शनिवार, 12 दिसंबर 2009

प्रयाग (इलाहबाद), वाराणसी एवं गोरखपुर

सामाजिक विधिक प्रचेतन समिति का मुख्य कार्यालय प्रयाग (जिसे आधुनिक बोलचाल की भाषा में इलाहबाद कहा जाता है ) में है। यद्यपि, समिति किसी भौगोलिक या पान्थिक / धार्मिक सीमा में संकुचित नहीं है, फ़िर भी, यह अपने उद्भव क्षेत्र प्रयाग एवं प्रेरणा क्षेत्र काशी /वाराणसी एवं गोरखपुर से विशेष लगाव रखती है। इन स्थानों के बारे में जानने के लिए कृपया इनके नामों पर क्लिक करें। वाराणसी के बारे में और जानने के लिए यहाँ भी क्लिक करें

बुधवार, 18 नवंबर 2009

हमारी संवेदना !

सर्व भूत हिते रत: । अर्थात समस्त प्राणियों एवं उनके संघटक भूतों (धरती , जल, वायु, अग्नि एवं आकाश) के हित में संलग्न रहना !!!